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aarya bharat aaye aur aane ke baad kya kiya


आर्य मजमुई तौर पर सर पर निहायत शरीफ बहादुर और बावसुल लोग थे सलाहियत के एतबार से उस वक्त की कोई कौम भी उनके हम पल्ला ना थी चुनांचे मालिक को मालिक ने









उन्हें हमारे मुल्क के इंतजाम का मौका दीया इन लोगों ने अपनी बेहतरीन सलाहियत से कम लिया मुद्दतों इस मुल्क की खिदमत करते रहे इसे बनाया संवारा जंगलात साफ करके बहुत हिस्से काबिले कास्त बनाया  आलूम वा फनून   को तरक्की दी रहन सहन और अखलाक व   मोअसरात मैं इस्लाह की यहां के वसाइल व जारिया  को बेहतरी के कामों में इस्तेमाल किया ईश्वर ने मुद्दतों उन्हें अपनी रहमतों से नवाजा








बेहतरीन सलाहियतो  को उजागर करने का मौका दिया मुल्क को उनकी खिदमत से बहुत फायदा पहुंचा मगर रफ्ता-रफ्ता वह भी बिगड़ने लगे आपस की नाइत्तेफ़ाकी ने खाना जंगी की सकल इख्तेयार की इज्तेमाई निजाम ढीला पड़ गया इक्तेदार   के नशे में बे ऐतेदालिया सुरु  हुई pakeezah
उसूलों से अन्हराफ़ होने लगा नतीजे में अखलाक पुस्त हो गए आमाल व कायदा में मकामी रंग गालिब आने लगा और वह सारी खराबियां उनमें भी जड़ पकड़ने लगी जो उनसे पहले की  कौमो में पाई जाती थी इल्म के दरवाजे आवाम पर बंद कर दिए गए जिससे आवाम जेहालत और तोहमत में फस गई जात-पात छूत छात ऊंच-नीच की लानत  समाज को टुकड़े-टुकड़े करके रख दिया लोगों के दिल आपस में फट गए सारे pakeezah उसूल जाति वगैरह ही मुफीद पर भेंट चढ़ाये है जाने लगे ऐसे जाब्ते  घड़े गए जिन से गरीबों की गाढ़ी कमाई पर खुदगर्ज लोगों के बाज़  तबक़े  दारे ऐस देने लगे और लाखों बंदगाने इस्वर की दी हुई जिंदगियां ही नहीं बल्की जानवरों से भी बदतर हो गई औरतो और निचलेे तबके के आवाम को बुनियादी इंसानी हुकूक से भी महरूम कर दिया गया कानून की रोसे इंसानों के माबैन नुमाया  फर्क किया जाने लगा बेवा औरतें अपने शौहर की लाश के साथ जल जाने सती पर मजबूर होने लगी नतीजे में बाहेमी मुनाफरत  फितना फसाद खाना जंगिया अंदरुनी शोरशे और से बरौनी हमले ग़रज़  चौका देने वाले मुतद्द्  वाक्यात हुए बहुत से दर्द मंद उठे इस्लाहे  हाल की कोशिश की जब तक उन कोशिशों का खतरा खवा नतीजा निकलता रहा उन्हें बरबाद मोहलत मिलती रही मगर रफ्ता-रफ्ता जब बिगाड़ बढ़ता ही गया और तामीरी   सलाहियते   दिन ब दिन घटती ही गई कोशिश ने गलत रुख अख्तियार कर लिया और मजमुइ तौर पर बनाओ के काम और  बिगाड़  के काम  ज्यादा होने लगे और मुस्तक़बिल करीब में किसी बेहतरी की उनसे तोका ना रही तो अपने अटल दस्तूर के मुताबिक मालिके कायनात ने इस मुल्क का इंतजाम उनसे छीन लिया और अरब नेज वास्ते एशिया की उन कौमो को यहां काम का मौका दिया जो इस्लाम से मुतासिर होकर बेहतर सलाहियतों  की मालिक हो गई थी
bharat se dharwad ko kis ne jane ke liye majboor kiya

bharat se dharwad ko kis ne jane ke liye majboor kiya


dharawad"" भारत में बहार से आने वालो में दरावड़ खास थे । वह इस मुल्क के जयादा तर हिस्सों में
फैल गए । यहाँ पर हर जगह कब्ज़ा किया और एक ज़बरदस्त बुनियाद डाली जिस पर 'हड़प्पा' मोहन जोदोड़ो' और जुनूबी हिन्द के बाज़ मकामात खंडरात अब तक गवाह है । dharawad मुद्दतो  इस मुल्क पर काबिज़ रहे । इस्वर ने उन्हें अपनी बहोत सी नेमतों से नवाजा , मगर रफ्ता रफ्ता इन के जनाशिन  भी ऐसा वा इसरत में फँस गए । उन्होंने एक इस्वर  केे साथ साथ देवी देवताओ को सरीक करना सुरु कर दिया , जादू टोने और छु मंतर का आलम भी रिवाऐज़ हो गया । तो हम परस्ती ने व्हेशियना जुल्म पर आमद हो गया । देवी देवताओ वग़ैरह पर इंसानो की मोहतरम जाने तक क़ुर्बान की जाने लगी । ग़रीबो और मजबूरों पर ज्यादती होने लगी । बनाओ से कही जयादा बिगाड़ शुरू हुवा । इस्वर की ये बनाई संवारी सरजमी मामूली तोर पर फितना फसाद से भर गई । नतीजे में इस्वर का कहर गज़ब टुट पड़ा , क्यों न हो वह तो पूरी दुनिया की नफा रसानी को पसन्द करता है। इस सूरते हाल के बावजूद मोहलत भी देना उसकी शान के खिलाफ होता । and उस ने आर्य नामी एक बैरोनि कौम को उन पर मोसल्लत कर दिया । जिसने उनकी शानदार बस्तियों की ईंट से ईंट बजा दी , उनके आलिशान महलो और मज़बूत किलो को तहस नहस कर दिया । कितनो का क़त्ल हुवा । कितनो ने भाग कर जंगलो और पहाड़ो में पनाह ली , कितने नोकर चाकर  and गुलाम बना लिए गए । और न फरमान लोगों का यही हस्र होता है।